सूरजपुर – परिचय

 

 

 

सूरजपुर एक शहर एवं नगर पालिका है जो कि मध्यभारत के छत्तीसगढ़ राज्य के सूरजपुर जिले में स्थित है. यह सूरजपुर जिले का प्रशाशनिक मुख्यालय भी है जो छत्तीसगढ़ की राजधानीरायपुर से उत्तर में 256 किमी की दूरी पर स्थित है. 15 अगस्त 2011 में राज्य के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह जी के द्वारा 8 अन्य जिलों के साथ सूरजपुर को भी जिला घोषित किया गया.अस्तित्व के हिसाब से भले ही यह जिला नया है पर सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्र में यह बहुत ही समृद्ध है. सूरजपुर जिले के अंदर 6 तहसील आते हैं जिनके नाम हैं प्रतापपुर, ओडगी, भैयाथान, सूरजपुर, रामानुज नगर और प्रेमनगर.

सूरजपुर से राष्ट्रीय राजमार्ग 43 गुजरता है जो इसे राज्य के अन्य क्षेत्र के लिए सुगम बनाता है. सूरजपुर अपने बाज़ार(आर्थिक और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद) और अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलोंजैसे तमोर पिंगला वन्य जीव अभ्यारण के लिए जाना जाता है.

पर्यटन-

कुदारगढ़- सूरजपुर जिला मुख्यालय से 25 किमी की दूरी पर स्थित कुदारगढ़ राज्य का एक प्रसिद्ध हिंदू तीर्थ स्थल है. यह सभी मौसम में सड़क मार्ग के द्वारा सुगम है. यहां की यात्रा के लिएचैत्र नवरात्र (अप्रैल का महीना) का समय सबसे अच्छा है.

शिवपुरी का शिव मंदिर- प्रतापपुर अंबिकापुर से 45 किमी दूर है एवं प्रतापपुर से शिवपुरी गांव 4 किमी की दूरी पर स्थित है. शिवपुरी शिव मंदिर के लिए प्रसिद्ध है. यहां शिवरात्रि और वसंतपंचमी के अवसर पर बड़े समारोह का आयोजन होता है जिसमें राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल होते हैं.

महामाया मंदिर- सूरजपुर से कुछ दूरी पर स्थित देवीपुर लोगों की आस्था का केंद्र है. यहां स्थित महामाया मंदिर राज्य के सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है. राज्य के विभिन्नस्थानों से लोग यहां महामाया देवी के दर्शन के लिए आते हैं और बीते कुछ दिनों में यह छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों में एक प्रमुख स्थल बन कर उभरा है.

सूरजपुर के लोगों का महामाया देवी में अपार विश्वास है और नवरात्री के पावन अवसर पर यहां एक विशाल मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें शामिल होने के लिए भक्तों का एकविशाल जत्था यहां पहुंचता है. भक्तों को सूरजपुर से देवीपुर पहुंचने में किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना ना करना पड़े, इसके लिए सूरजपुर की भक्त मंडली के द्वारा दैनिक मुफ्त बससेवा प्रदान की जाती है. साथ ही हर साल इस विशाल आयोजन को सफल बनाने में यहां के स्थानीय लोगों और प्रशासन की तरफ से भी भरपूर सहायता मिलती है.

डुगडुगी पत्थर- भैया थान तहसील मुख्यालय से लगे ग्राम जमड़ी के पहाड़ पर प्रकृति की एक अद्भुत रचना है.पहाड़ के शीर्ष पर पत्थर के दो हिस्से हैं जिसमें से ऊपर के हिस्से को हिलाने परडुगडुगी जैसी आवाज निकलती है. इसकी वजह से ही इसका नाम डुगडुगी पत्थर पड़ा है. इससे निकली आवाज से पूरा जंगल गुंजायमान हो उठता है. इस जंगल में ग्राम जमड़ी और घोंसा केचरवाहे ग्राम के मवेशियों को चराने आते हैं. जंगल में मनोविनोद करने के लिए कभी-कभी वे अपने साथियों के साथ डुगडुगी पत्थर को बजाते हैं. इस पत्थर से निकलने वाली आवाज केअन्य पत्थरों से अलग होने के कारण ग्रामीणों में भी कौतूहल रहता है.

इस पत्थर के करीब ही झंडा पत्थर भी है जहां क्षेत्र के ग्रामीणजन अपनी श्रद्धा के अनुरूप ध्वज और नारियल का चढ़ावा चढ़ाते हैं. ग्रामीणों की ऐसी मान्यता है कि झंडा बाबा उनकी हर मुरादपूरी करते हैं.

उद्योग- सूरजपुर अपने कोयला खदानों से प्राप्त उच्च गुणवत्ता वाले कोयले के लिए प्रसिद्ध है. प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले कोयले का उचित लाभ उठाने के लिए यहां एसइसीएल का मुख्यालय भी स्थापित किया गया है.

जन सामान्य की जानकारी- वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार सूरजपुर की जनसंख्या 6,60,280 है जिसमें पुरुष 53% व महिलाएँ 47% हैं. यहाँ 16% लोगों की उम्र 6 वर्ष से कम है.